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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 89 वी त्रिमूर्ति शिव जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाया गया


प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 89 वी त्रिमूर्ति शिव जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाया गया

गौरव मिश्रा सूरजपुर ✒️

सुरजपुर / प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 89 वी त्रिमूर्ति शिव जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाया गया इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माननीय भ्राता भीमसेन अग्रवाल जी, वरिष्ठ भाजपा नेता। विशिष्ट अतिथि एस .डी .एम .सूरजपुर श्रीमती बहन शिवानी जायसवाल, भ्राता अनिल गोयल जी वरिष्ठ अधिवक्ता, भ्राता लालचंद अग्रवाल जी वरिष्ठ नागरिक संघ की संयोजक, डी. एस .पी. महालक्ष्मी कुलदीप जी, ब्रह्माकुमारी पार्वती दीदी बिश्रामपुर सेवा केंद्र संचालीका, ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी सूरजपुर सेवा केंद्र संचालीका उपस्थित थे।


कार्यक्रम में उपस्थित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भीमसेन अग्रवाल जी ने सभी को शिवरात्रि की बधाई देते हुए कहा शिव भगवान ही विश्व कल्याण के लिए सागर मंथन में निकला विष को भगवान शिव ने पिया और जब गंगा अवतरित हुई तो उसके वेग को कौन रोक सकता है वह भी भगवान शिव ही है जो परिवार में संतुलन बनाकर रखना सिखाते हैं सब लोगों के साथ में विश्व के कल्याण के लिए जीना ही विश्व कल्याण करने का संदेश देना है इससे बेहतर उदाहरण कोई नहीं है आज सारा विश्व शांति की खोज में है शांति से जीना चाहता है सुखी जीवन व्यतीत करना चाहता है लेकिन हम इसे दूसरी जगह ढूंढते हैं हम सोचते हैं दान पुण्य से शांति मिलेगी लेकिन अपने अंदर ढूंढेंगे तो निश्चित रूप से शांति मिलेगी आपको शिव बनना पड़ेगा आपको नेकी करनी पड़ेगी की हमारे साथ कौन है सद्गुणों को देखना पड़ेगा उसके साथ में चलेंगे तो आपको भी निश्चित रूप से शांति मिलेगी और भौतिक उपलब्धि भी होगी।

 भ्राता लालचंद अग्रवाल जी ने अपने उद्बोधन में कहा की शिवरात्रि हम सब लोगों के लिए बहुत महान पर्व है अपनी भक्ति से श्रद्धा से अपनी पूजा से शिव जी को प्रसन्न कर लिया तो सहज ही वरदान मिल जाता है जैसे राक्षस भी श्रद्धा से भक्ति करते हैं तो भोलेनाथ शिव जी सहज ही प्रसन्न होकर वरदान दे देते हैं जैसे शिवजी ने भस्मासुर को वरदान दिया था और वह अमर हो गए थे और उन्होंने वरदान का दुरुपयोग किया तो अंत में स्वयं ही भस्म हो गए, शिव भोलेनाथ सभी के कल्याणकारी हैं इसलिए वह भोलेनाथ है। एस .डी .एम. बहन शिवानी जायसवाल ने खास बताते हुए सबको महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं दिया तथा इस संस्था द्वारा आयोजित महाशिवरात्रि के कार्यक्रम में उन्हें असीम शांति एवं पवित्रता की अनुभूति होना बताया। डी .एस .पी .बहन महालक्ष्मी ने बताया कि हमें इस महाशिवरात्रि पर्व में अपने अंदर के जो कड़वाहट खराबी है किसी को कष्ट देने वाली ,सृष्टि को कष्ट देने वाली ,प्रकृति को दुख देने वाली, जो भी विकारों की ओर ले जाने वाली बुराइयां है उसको परमात्मा शिव को समर्पण कर खुद को शुद्ध पवित्र बनानी है इससे हमारे जीवन में शुद्धता पवित्रता आती है और जब शुद्धता और पवित्रता हमारे जीवन में आती है तो हर एक के लिए शुभभावना शुभकामना निकलती है जिससे समाज में और वातावरण में भी पवित्र और शुद्ध वाइब्रेशन फैलता है। भ्राता अनिल गोयल जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि इस कार्यक्रम में उपस्थित होकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं उन्होंने कहा की इस संस्था को भारत सरकार एवं विश्व के द्वारा अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, इस संस्था को सरकार पुरस्कार प्रदान कर स्वयं ही गौरवान्वित हुई है यह संस्था बहुत विशाल है जिसकी शाखा सारे संसार में है और इस विशाल संस्था की कार्यक्रम में हम उपस्थित हुए हैं यह हमारे लिए गर्व की बात है। ब्रह्माकुमारी पार्वती दीदी ने कहा कि आज हम चारों ओर देख रहे हैं कि धर्म की अति ग्लानि हो रही है चारों ओर पापा चार भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है अर्थात भगवान के आने का समय यही है जब कहा जाता है शिवरात्रि तो ऐसे घोर रात्रि रूपी अंधकार जहां चारों ओर पापा ,भ्रष्टाचार चर्म सीमा पर है हर मनुष्य के द्वारा एक ही पुकार आती है हे प्रभु आकर शांति दो मुक्ति दो हमें इस परस्थिति से पार करने की शक्ति दो आज संसार में हर मानव को क्या चाहिए सुख शांति जिसको पाने के लिए हम अनेक प्रकार की विधि अपनाते हैं पूजा अर्चना के रूप में भक्ति के रूप में चाहे मंदिर जाकर चाहे व्रत उपवास कर अनेक प्रकार के तीर्थ में दान पुण्य करके लेकिन जीवन में सुख शांति खुशी नहीं आई क्योंकि उसको हमने बाहर की दुनिया में ढूंढा हमने दूसरों से मांगा और आज हर मनुष्य दुखी है लेकिन ज्ञान ,सुख, शांति ,खुशी सर्व शक्तियों का स्रोत एक परमपिता परमात्मा है जो हम सब का पिता है पिता अर्थात सर्व प्राप्तियां से भरपूर करने वाला तो जब हम उस पिता के पास जाएंगे तो सुख चाहिए ज्ञान शक्ति खुशी चाहिए वह मिल जाएगा क्योंकि वह भरा हुआ है इसलिए उसे कहते हैं सुख का सागर ,ज्ञान का सागर ,प्रेम का सागर कहते हैं, हमें भी अगर सुख शांति चाहिए तो उस परमात्मा से अपना बुद्धि का कनेक्शन जोड़ना पड़ेगा फिर उनसे सर्व प्राप्तियां सहज हो जाएगा । 

ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया तथा ब्रह्माकुमारी रूपा दीदी ने कुशल मंच संचालन किया ,कार्यक्रम का शुभ आरंभ सभी अतिथियों को बैच लगाकर ,गुलदस्ता देकर एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया इस कार्यक्रम में करीब 200 लोगों ने भाग लिया कुमारी तपस्या ,कुमारी रानू स्वागत डांस कर सबका मन मोह लिया इस कार्यक्रम के अंत में केक कटिंग कर शिवरात्रि मनाया गया और अंत में सभी को ईश्वरीय प्रसाद एवं सौगात तथा ईश्वरीय पत्रिका भेंट किया गया।