फर्जी दस्तावेजों पर जारी दवा लाइसेंस निरस्त, खाद्य एवं औषधि विभाग की बड़ी कार्रवाई***सत्य की जीत*
गौतम गुप्ता. 🖊️ सह. संपादक खबर छत्तीसगढ़
**सूरजपुर।** फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के सहारे आर डी लक्ष्मी मेडिकल प्रोपराइटर (अंकुश गुप्ता) भैयाथान रोड सूरजपुर दवा विक्रय लाइसेंस हासिल करने वाले एक मेडिकल स्टोर संचालक पर आखिरकार प्रशासन का डंडा चल गया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित मेडिकल स्टोर का दवा विक्रय लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। विभाग द्वारा जारी विस्तृत आदेश में जांच के दौरान सामने आईं गंभीर अनियमितताओं, विसंगतियों और नियमों के उल्लंघन का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
### **दस्तावेजों में पाई गई थीं गंभीर विसंगतियां**
गौरतलब है कि जिस भूमि पर यह मेडिकल एजेंसी संचालित की जा रही थी, उससे जुड़े दस्तावेज, किरायानामा, अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) और अन्य अभिलेखों की वैधता पर शुरुआत से ही गंभीर सवाल उठ रहे थे।
नगर पालिका परिषद सूरजपुर, उप पंजीयक कार्यालय और नजूल अधिकारी की जांच रिपोर्टों में भी इन दस्तावेजों पर कड़ी आपत्तियां दर्ज की गई थीं। विभिन्न जांच रिपोर्टों में यह साफ हो चुका था कि प्रस्तुत किए गए कई महत्वपूर्ण अभिलेख वास्तविक सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे। विभाग ने पूरे प्रकरण की गहन समीक्षा करने और संबंधित पक्ष को सुनवाई का पूरा अवसर देने के बाद नियमों के तहत लाइसेंस रद्द करने का यह कड़ा फैसला सुनाया।
### **आवेदक राधेश्याम गुप्ता ने कहा— "यह सत्य की जीत है"और खाद औषधि प्रशासन, जिला प्रशासन, सहित सभी मीडिया कर्मी अन्य का जताया आभार**
इस पूरे मामले को उजागर करने वाले मुख्य आवेदक **राधेश्याम गुप्ता** ने लाइसेंस निरस्त होने के आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे न्याय और सत्य की जीत बताया है।
> **राधेश्याम गुप्ता ने कहा:**
> "फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध रूप से दवा दुकान का संचालन करना न सिर्फ नियमों का मखौल उड़ाना था, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ था। देर से ही सही, लेकिन विभाग ने एक सही और न्यायसंगत निर्णय लिया है। मैं इस निष्पक्ष कार्रवाई के लिए खाद्य एवं औषधि विभाग, जिला प्रशासन और विशेष रूप से मीडिया कर्मियों का सहृदय धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ, जिन्होंने इस जनहित के मुद्दे को प्रमुखता से उठाकर प्रशासन तक सही आवाज पहुंचाई।"
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### **अब FIR की तैयारी? प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज**
दवा विक्रय लाइसेंस निरस्त होने के बाद अब सूरजपुर के प्रशासनिक और कानूनी हलकों में यह सवाल तेजी से तैर रहा है कि क्या संबंधित दुकान संचालक के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा?
चूंकि विभागीय जांच में दस्तावेज फर्जी और कूटरचित (Forged) पाए जा चुके हैं, इसलिए अब संचालक के खिलाफ **भारतीय न्याय संहिता (BNS)** की प्रासंगिक धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग उठ रही है।
इस बड़ी कार्रवाई के बाद सूरजपुर जिले में फर्जी दस्तावेजों के सहारे चल रहे अन्य व्यवसायों और लंबित मामलों की भी गहन जांच की मांग ने जोर पकड़ लिया है। जागरूक नागरिकों का मानना है कि यदि प्रशासन इसी तरह अन्य विभागों में भी दस्तावेजों का व्यापक भौतिक सत्यापन (Verification) शुरू करे, तो आने वाले दिनों में कई और बड़े फर्जीवाड़ों का भंडाफोड़ हो सकता है।


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