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समाज का गजेंद्र यादव को भव्य सम्मान


 

समाज का गजेंद्र यादव को भव्य सम्मान


चाँदी का मुकुट और बांसुरी भेंट कर जताया आभार

गौरव मिश्रा सूरजपुर ✒️

सूरजपुर। प्रदेश की राजनीति में नई ऊर्जा और नई सोच का प्रतिनिधित्व कर रहे नवगठित मंत्रिमंडल के स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री तथा दुर्ग विधायक गजेंद्र यादव का सर्व यादव समाज युवा प्रकोष्ठ ने दुर्ग स्थित उनके निज निवास पर ऐतिहासिक स्वागत किया।


सैकड़ों की संख्या में पहुँचे समाजजन ने मंत्री का फूल-मालाओं व जयघोष के साथ अभिनंदन किया। इस दौरान उन्हें चाँदी का मुकुट और बांसुरी भेंट की गई। मुकुट को नेतृत्व और सम्मान का प्रतीक बताया गया, वहीं बांसुरी को भगवान श्रीकृष्ण से जोड़कर प्रेम और सामाजिक समरसता का संदेश माना गया।



भावुक हुए मंत्री यादव


सम्मान स्वीकार करते हुए मंत्री गजेंद्र यादव भावुक हो उठे। उन्होंने कहा—

“यह सम्मान मेरे लिए गर्व ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का संदेश है। समाज के सहयोग और आशीर्वाद से ही राजनीति में यह मुकाम मिला है। मंत्री पद जनता की सेवा का अवसर है।”

उन्होंने भरोसा दिलाया कि युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।



*“गौरव का क्षण” : युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष*


युवा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष परमेश्वर यादव ने कहा—

“गजेंद्र यादव जैसे नेता पर पूरे समाज को गर्व है। उन्होंने न केवल राजनीति में, बल्कि समाज सेवा में भी मिसाल कायम की है। मंत्री पद पर पहुँचकर उन्होंने प्रदेश की जनता और यादव समाज का मान बढ़ाया है।”



*उत्थान के मुद्दे भी रखे गए*


अभिनंदन समारोह में समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने छात्रावासों की संख्या बढ़ाने, ग्रामोद्योग आधारित प्रशिक्षण केंद्र खोलने, पिछड़े वर्ग के छात्रों को शिक्षा में विशेष अवसर देने तथा सांस्कृतिक-धार्मिक धरोहरों के संरक्षण जैसे मुद्दे मंत्री के सामने रखे।


मंत्री ने सभी सुझावों पर सकारात्मक पहल का भरोसा देते हुए कहा कि शिक्षा और ग्रामोद्योग के क्षेत्र में योजनाएँ बनाकर समाज और प्रदेश दोनों के विकास की दिशा तय की जाएगी।



*जय श्रीकृष्ण के नारों से गूँजा वातावरण*


कार्यक्रम में पूर्व नपं अध्यक्ष राजेश यादव, प्रदेश महासचिव सूरज यादव, गणेश यादव, रामलखन यादव, भुनेश्वर यादव सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।

समारोह के अंत में पूरा वातावरण “जय श्रीकृष्ण” के नारों से गूँज उठा और यह आयोजन समाज की एकजुटता और आस्था का प्रतीक बन गया।